चितरंजन कुमार:-
बिहार में पंचायती राज व्यवस्था के तहत पंचायत में वार्ड सदस्य पंचायत समिति सदस्य के साथ मुखिया और जिला पार्षद का चयन जनता के चुनाव से किया जाता है।पंचायत में पांच वर्ष पर चुनाव होता है।चुनाव के दौरान बड़ी बड़ी विकास के वादे प्रत्याशियों के द्वारा किए जाते हैं।जनता वादा के अनुसार प्रत्याशियों को वोट देकर अपना विश्वसनीय प्रत्याशी का चयन कर लेते हैं।चुनाव जीतने के बाद प्रत्याशी अपने वादे से इस तरह मुँह फेर लेते हैं जिस प्रकार एक भाई का दूसरे भाई से बटवारा के बाद व्यवहार करता हो।
औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड के बनिया पंचायत के कुशहा गांव के ग्रामीणों ने अब मूड बना लिया है कि अपने चुने हुए जनप्रतिनिधियों के व्यवहार से क्षुब्ध होकर उनके खिलाफ रणनीति के तहत सिलसिलेवार तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों के व्यवहार से मदनपुर प्रखंड के बनिया पंचायत के कुशहा गांव के ग्रामीण परेशान हैं।पंचायत चुनाव के 18 महीना बीत जाने के बाद अब कुशहा गांव के ग्रामीणों को पछतावा हो रहा है।पछतावा के पीछे का कारण बताते हुए ग्रामीणों ने बताया कि कुशहा गांव के ग्रामीण एकतरफा किसी भी प्रत्याशी को अपना मतदान करते हैं इसी अपेक्षा के साथ कि उनका अग्रोतर विकास होगा।लेकिन सबसे अधिक कुशहा गांव के ग्रामीणों को ही ठगा जाता है।
गांव के प्रबुद्ध ग्रमीणों ने बताया कि कुशहा गांव नाली और गली की जटिल समस्या से जूझ रहा है। लेकिन यहां के चुने हुए जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद इस लहकती गर्मी में AC का मजा ले रहे हैं।वे अब गांव में चुनाव के समय किये गयें वादे को भूल कर आराम की नींद फरमा रहे हैं।ग्रामीणों ने कहा कि चुने चुने हुए जनप्रतिनिधियों के द्वारा अपने घर के इर्दगिर्द रोड नाली गली में पकिकरन कर दी गई।लेकिन गाँव मे जो जटिल समस्या है,बजबजाती नाली की,गली में बह रहे नाली की पानी की उसकी चिंता किसी भी चुने हुए जनप्रतिनिधियों को नही है।
उस नाली और गली की समस्या को बताते हुए एक ग्रामीण ने बताया कि गांव के ही पंचायत समिति सदस्य हैं, लेकिन उन्हें गांव की कोई चिंता नही है।जब वे चुनाव जीते तो सबसे पहले उन्होंने। अपने घर के पास फेवर ब्लॉक वाली चकचकाती हुई रोड बनवाया।उसके बाद दूसरा काम उसी जगह पक्का नाली का निर्माण करवाया।लेकिन गांव की समस्या को चुनाव जीतने के बाद वे जानने तक नही आएं।अब बात करते हैं मुखिया जी की।पंचायत में ईमानदार के नाम से जाना जाता है, बनिया पंचायत के महिला मुखिया सीता देवी को और उनके मुखिया प्रतिनिधि रामानंद रविदास को लेकिन अपनी ईमानदारी के वजह से चुनाव जीतने के बाद मुखिया जी गांव में जब भी कोई आमंत्रण में पहुंचते हैं तो दर्जनों बार समस्या को अपने आंखों से देखा है।
पूछे जाने पर अबकी में वार्ड 6 कुशहा में ही काम लगेगा।ऐसा कहते कहते 18 माह बीत गई लेकिन कुशहा में कोई काम नही लगा।ग्रामीणों ने कहा कि अगर पूर्व में कोई नाली गली किसी के फंड से बना रहता तो उसका पैसा चुने हुए जनप्रतिनिधियों के द्वारा पुनः योजना में लाकर पैसा का निकासी कर लिया जाता लेकिन गांव में पूर्व में कोई काम ही नही हुआ है।बात करते हैं जिला पार्षद विकास कुमार की नाम से ही विकास हैं।काम विकास की करते हैं कि नही ये तो जनता तभी जानेगी जब तक कोई काम करेंगे।उनके द्वारा भी कुशहा गांव में कोई काम आज तक नही किया गया है।
उनसे ग्रामीणों ने आग्रह किया था कि श्मशान घाट पर जाने के लिए जमीन तो है लेकिन कोई रास्ता और रोड का निर्माण आजादी 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी नही हो पाया है।उन्होंने चुनाव के समय वादा किया था कि चुनाव जीतेंगे तो श्मशान घाट तक जाने के लिए रोड का निर्माण जरूर करेंगे।लेकिन उन्होने वादा खिलाफी तो किया लेकिन शमशान घाट ओर सेड का निर्माण के लिए मटेरियल गिरा दिया है,अब कुछ दिन में कार्य भी प्रारम्भ हो जाएगा।चुनाव जीतने के बाद ग्रामीणों ने नाला निर्माण करवाने का आग्रह किया तो उनका जवाब मिलता है कि क्षेत्र बड़ा है देख लिया जाएगा।
पांच वर्ष में कभी न कभी बन जाएगा।कुशहा गांव के ग्रामीणों को अपने चुने हुए MLA विधायक से काफी अपेक्षा था कि उनके द्वारा कुछ न कुछ इस बार किया जाएगा।लेकिन गांव के ग्रामीण आज तक उनके भी विकास कार्य से उपेक्षित हैं।
Note:-ग्रामीणों ने बताया कि गांव के इस जटिल समस्या को लेकर जल्द ही प्रखंड कार्यालय पर धरना देंगे और समस्या को निजात नही होगा आंदोलन का रूप रेखा होगा तैयार।











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