एजुकेशनल कॉन्क्लेव में शिक्षा और करियर पर मंथन, पत्रकार व छात्रों के सवालों का तक्षशिला पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने दिया स्पष्ट जवाब।
कहा हर छात्र की क्षमता अलग होती है। दूसरों से तुलना न करें, अपने लक्ष्य को पहचानें और नियमित मेहनत पर भरोसा रखें।
चितरंजन कुमार, औरंगाबाद।
औरंगाबाद शहर से सटे हसौली में स्थित तक्षशिला पब्लिक स्कूल में एजुकेशनल कॉन्क्लेव में शिक्षा की गुणवत्ता, करियर मार्गदर्शन और बढ़ते कोचिंग कल्चर को लेकर गंभीर और सार्थक चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में छात्रों के साथ-साथ स्थानीय पत्रकार ने भी बढ़-चढ़कर सवाल किया। कॉन्क्लेव में तक्षशिला पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने पत्रकार और छात्रों द्वारा पूछे गए सवालों का बेबाकी से जवाब दिया।
पत्रकार के सवाल
सीतयोग खबर के पत्रकार चितरंजन कुमार ने विद्यालयों की भूमिका, शिक्षा के साथ छात्रों के भविष्य से जुड़े सवाल और तक्षशिला के मतलब के साथ स्कूल के साथ कोचिंग कल्चर से जुड़े सवाल उठाए। इस पर डायरेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि “शिक्षा केवल डिग्री या अंकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। एक स्कूल की जिम्मेदारी है कि वह छात्रों के भीतर सोचने-समझने की क्षमता और नैतिक मूल्यों का विकास करे।” उन्होंने कहा कि तक्षशिला पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, संस्कार और व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। स्कूल के अलावे बढ़ते कोचिंग कल्चर पर डायरेक्टर ने जवाब देते हुए स्पष्ट और संतुलित राय रखते हुए कहा कि “स्कूल कभी भी कोचिंग का विकल्प नहीं, बल्कि मजबूत आधार होता है। कोचिंग केवल सहायक भूमिका निभा सकती है, उसे अनिवार्य बनाना छात्रों पर अनावश्यक दबाव डालता है।”उन्होंने आगे कहा कि “यदि स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुभवी शिक्षक और नियमित मूल्यांकन हो, तो छात्रों को हर विषय के लिए कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ती।” साथ ही यह भी जोड़ा कि कोचिंग तभी उपयोगी है, जब वह छात्र की कमजोरी को दूर करे, न कि उस पर आर्थिक और मानसिक बोझ डाले।
छात्रों के सवाल, कॉन्क्लेव में छात्रों ने करियर चयन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, स्कूल और कोचिंग के बीच संतुलन तथा असफलता के डर को लेकर सवाल पूछे। इस पर अरविंद कुमार सिंह ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा। “हर छात्र की क्षमता अलग होती है। दूसरों से तुलना न करें, अपने लक्ष्य को पहचानें और नियमित मेहनत पर भरोसा रखें।”उन्होंने छात्रों को मोबाइल और सोशल मीडिया के सीमित उपयोग तथा आत्मअनुशासन अपनाने की सलाह भी दी।
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“शिक्षा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम है। हमारा प्रयास है कि हर वर्ग के छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सही मार्गदर्शन मिले।” उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान द्वारा समय-समय पर करियर काउंसलिंग, स्कॉलरशिप और विशेष मार्गदर्शन कार्यक्रम चलाए जाते हैं, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी पीछे न रहें।
छात्रों के सवाल की असफलता से कैसे निपटें और पढ़ाई के साथ मानसिक दबाव जैसे सवाल पूछे। इस पर डायरेक्टर ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि “हर छात्र की क्षमता अलग होती है। तुलना से बचें, लक्ष्य तय करें और निरंतर अभ्यास करें। सफलता देर से मिल सकती है, लेकिन मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।” स्कूल बनाम कोचिंग कल्चर पर जवाब कोचिंग कल्चर पर पूछे गए सवाल के जवाब में डायरेक्टर ने संतुलित दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि “कोचिंग कभी भी स्कूल का विकल्प नहीं हो सकती। स्कूल आधार है और कोचिंग केवल सहायक माध्यम। दुर्भाग्य से आज कुछ जगहों पर कोचिंग को अनिवार्य बना दिया गया है, जो सही नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई, अनुभवी शिक्षक और नियमित मार्गदर्शन हो, तो छात्रों को अनावश्यक कोचिंग का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही यह भी जोड़ा कि “कोचिंग तभी उपयोगी है, जब वह छात्र की कमजोरी को दूर करने में मदद करे, न कि उस पर मानसिक या आर्थिक बोझ डाले।“अपने लक्ष्य को पहचानें, स्कूल की पढ़ाई को प्राथमिकता दें और जरूरत हो तभी कोचिंग का सहारा लें। अंधी प्रतिस्पर्धा से बचना बेहद जरूरी है।
एजुकेशनल कॉन्क्लेव के दौरान जब शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर सवाल उठाया गया, तो तक्षशिला पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने इस विषय पर अपनी स्पष्ट और व्यक्तिगत राय रखी।डायरेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि“मैं शिक्षा और नौकरी में आरक्षण का विरोधी हूं। मेरा मानना है कि शिक्षा और अवसर योग्यता, मेहनत और प्रतिभा के आधार पर मिलने चाहिए। इससे छात्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आत्मनिर्भरता बढ़ती है।उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि “हर छात्र को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना राज्य और समाज की जिम्मेदारी है। जब शुरुआती स्तर पर सभी को बराबर अवसर मिलेंगे, तभी वास्तविक समानता स्थापित होगी।अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि आरक्षण पर समाज में स्वस्थ और तार्किक चर्चा की आवश्यकता है, ताकि भविष्य की पीढ़ी को केवल सुविधा नहीं, बल्कि सक्षम और आत्मविश्वासी बनाया जा सके।
छात्र का सवाल “मैं पढ़ने में ठीक हूँ, मैं यह भी समझ पाता हूँ कि मुझे और बेहतर करने की जरूरत है, लेकिन सवाल यह है कि और बेहतर कैसे करूँ? इस सवाल के जवाब में तक्षशिला पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि “सबसे अच्छी बात यह है कि आप अपनी कमी और संभावनाओं को पहचान पा रहे हैं। यही सुधार की पहली सीढ़ी है। अब जरूरी है कि आप अपने प्रयास को सही दिशा दें। उन्होंने आगे छात्रों को चार व्यावहारिक सूत्र बताए स्पष्ट लक्ष्य तय करें – केवल ‘अच्छा पढ़ना’ नहीं, बल्कि यह तय करें कि किस विषय में कितना सुधार चाहिए।कमजोरी पर फोकस करें,जो विषय कठिन लगते हैं, उनसे भागें नहीं, बल्कि रोज़ थोड़ा समय विशेष रूप से उन्हें दें।रूटीन और अनुशासन अपनाएँ और नियमित समय पर पढ़ाई, दोहराव और स्वयं का मूल्यांकन बेहद जरूरी है। सही मार्गदर्शन लें शिक्षक से सवाल पूछें, शंका स्पष्ट करें और ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त अभ्यास करें।
अरविंद कुमार सिंह ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि “बेहतर बनने का मतलब दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि हर दिन खुद से बेहतर बनना है। निरंतरता और धैर्य ही सफलता की असली कुंजी है।” छात्रों ने इस उत्तर को व्यवहारिक और प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें पढ़ाई की दिशा स्पष्ट हुई।










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