भगवा देश की पहचान और संस्कृति का आवरण है राजनीतिक कारणों शिक्षा को कमजोर करने का षड्यंत्र किया जा रहा है-आलोक सिंह
देश की शिक्षा को जन आकांक्षाओं के अनुरूप बनाया जाना ही श्रेयस्कर है। कालांतर में देश में मैकाले शिक्षा नीति को ही आधुनिकता प्रदान किया गया जो दुर्भाग्यपूर्ण रहा बच्चों की शिक्षा संस्कार युक्त स्वावलंबी बने इसके लिए मात्री भाषा का प्रयोग आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है।
उक्त बात भाजपा के जिला मंत्री सह सभापति प्रतिनिधि बिहार विधान परिषद आलोक कुमार सिंह ने तब कहा जब भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने हरिद्वार के देव संस्कृति यूनिवर्सिटी के एक समारोह में कहा कि हम पर शिक्षा का भगवाकरण करने का आरोप है लेकिन फिर भगवा में गलत क्या है? उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा के माध्यम के रूप में विदेशी भाषा को लागू करने से शिक्षा सीमित हो गई।मैं वो दिन देखना चाहता हूं जब हर भारतीय अपने साथी देशवासियों से अपनी मातृभाषा में बात करें,प्रशासन का काम मातृभाषा में चले और सभी सरकारी आदेश लोगों कि अपनी भाषा में जारी किया जाए।
इसके बाद अपना बयान जारी करते हुए भाजपा के जिला मंत्री सह सभापति प्रतिनिधि बिहार विधान परिषद आलोक कुमार सिंह ने कहा कि प्राचीन काल में हमारी संस्कृति ने गुरुकुल के दौर में शिक्षा का महत्व दुनिया को बतलाया है। दशमलव पाई और शून्य की प्रसंगिकता को दुनिया में दिखलाया है।
अंग्रेजी का प्रभाव आज भी जकड़न में है।देश की पहचान हिंदी की स्वीकार्यता को समाप्त नहीं कर सकती।हिंदी और संस्कृत सभ्यता का सबसे पुरानी भाषा है जिसके माध्यम से दुनिया को मानव सभ्यता के अनुरूप शिक्षा को प्रभावी और व्यवहारिक बनाया है।
शिक्षा के माध्यम को आज भी देश के अधिकांश भाग में बोली जाने वाली भाषा हिंदी को मजबूत किए बिना शिक्षा को प्रभावी नहीं बनाया जा सकता।देश का दुर्भाग्य है कि जब भी देश में हिंदी को महत्व दिया जाने लगता है तब एक वर्ग के लोग विकृत मानसिकता के चलते भगवाकरण का आरोप लगाने लगते हैं।जबकि आदि काल में भी शंकराचार्य जी ने भगवा के माध्यम से ही देश के चारों दिशाओं में संगठित शक्ति का संकल्प दिया है। शिक्षा का भगवाकरण
स्वामी विवेकानंद ने भी दुनिया को भारतीय शिक्षा का दर्शन मजबूती से कराया है। गुरुकुल के समय की शिक्षा की आवश्यकता आज भी है।राजनीतिक कारणों से देश की शिक्षा का व्यापारी करण कर शिक्षा को कमजोर करने का षडयंत्र किया जा रहा है यही कारण है कि भगवा देश की पहचान और संस्कृति का आवरण।
ज्ञात हो कि भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने हरिद्वार के देव संस्कृति यूनिवर्सिटी के एक समारोह में कहा कि हम पर शिक्षा का भगवाकरण करने का आरोप है लेकिन फिर भगवा में गलत क्या है?










Leave a Reply