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अंकिता हत्या कांड पर मदनपुर में आयोजित हुई आक्रोश सभा

मदनपुर- अंकिता हत्या कांड, गत सप्ताह बिहार का पड़ोसी राज्य झारखण्ड की बेटी अंकिता तथा आदिवासी बेटी के साथ किया गया क्रूरतापूर्ण अत्याचार के पश्चात की गई हत्या की घटना से औरंगाबाद जिले का मदनपुर क्षेत्र में आक्रोश की आग धधकती दिख रही है ।

घटना को लेकर ही मदनपुर के धर्मशाला में राष्ट्रवादी संस्था सैल्यूट तिरंगा के तत्वाधान में आक्रोश सभा आयोजित की गई है। उपस्थिति द्वारा एक स्वर से मांग की गई कि हत्यारों को फांसी की सजा होनी चाहिए। साथ ही कहा गया की एक अति संवेदनशील मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा पारदर्शिता पूर्ण कार्रवाई किए जाने के बजाये सत्ता सिंहासन बचाने के लिए शतरंज की बाजीगिरी में व्यस्त हैं ।

प्रदेश महामंत्री राणा आशुतोष कुमार सिंह ने अंकिता हत्याकांड पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि अंकिता एक सामान्य

अंकिता हत्या कांड

अंकिता हत्या कांड पर मदनपुर में आयोजित हुई आक्रोश सभा

सपने ले कर जीने वाली झारखंड के एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी, जिसने अभी जीना शुरू भी नहीं किया था कि जला कर मार दी गयी।क्योंकि किसी शाहरुख का दिल आ गया था उसपर! उसे बीवी बना कर अपनी झोपड़ी में ले जाना चाहता था।

एक पढ़ी लिखी लड़की किसी जाहिल से विवाह का प्रस्ताव क्यों स्वीकार करती? सो मना कर दिया।शाहरुख को चुभ गयी बात,वही बर्बर मुगलिया सोच! जो पसन्द आ गयी वह मेरी है। खिलजी से लेकर अकबर तक सबने यही तो सिखाया है। किसी अंकिता की इतनी औकात कि वह किसी शाहरुख की बात काट दे? शाहरुख घर में घुसे, पेट्रोल गिराया और जला दिया।

लड़की खुद दौड़ कर आंगन में आई, बाल्टी से पानी लेकर अपने ऊपर उड़ेला… अठारह वर्ष की बच्ची की जीने की लालसा! इस छोटी आयु में मरना कौन चाहता है? अस्पताल में वह हर मिलने वाले से एक ही बात पूछती थी- “मैं बच तो जाऊंगी न?”पर नहीं बची। नब्बे फीसदी जल गई थी, कैसे बचती? जीवित जला दी गयी लड़की की पीड़ा कोई नहीं समझ सकता। कितना तड़पी होगी… और उसके तड़पने से कितना खुश हुआ होगा शाहरुख न! इसी लिए तो जलाया था।कहता था- मेरी न हुई तो तड़पा कर मारूंगा।

कोई मानवतावादी नेता,एक्टिविस्ट,दलित चिंतक, पत्रकार उससे मिलने अस्पताल नहीं गया। क्यों जाता? राजनीति लायक मुद्दा नहीं था न।मर गयी तो मर गयी। यह राजनीति और पत्रकारिता की संवेदना का स्तर है।

आप सोच कर देखिये, शाहरुख भी तो जानता होगा कि इसके बाद पकड़ा जाएगा और जिंदगी जेल में सड़ते हुए कट जाएगी। पर नहीं! वह जानता है कि उसके जैसे दस शाहरुखों ने यदि दस अंकिताओं को जला दिया, तो ग्यारहवीं अंकिता किसी शाहरुख को मना नहीं कर पायेगी। वह अपने मिशन में सफल है।

यही उसकी विजय है। पूरा खेल खौफ फैलाने का है।आशुतोष ने घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि हत्यारा यह भी जानता है कि उसके मुद्दे पर न कोई नेता विरोध करेगा, न किसी टीवी चैनल पर डिबेट होगा। उसको बचाने के लिए फंडिंग होगी और सम्भव है कि कुछ वर्षों में वह जेल से बाहर आ कर सुखी जीवन जीने लगे। इस देश में ऐसा होता रहा है।

शाहरुख अंकिता के पीछे बहुत दिनों से पड़ा था। वह कई बार उसके घर जा कर धमका चुका था। हर बार अंकिता के पिता उसे समझाने का प्रयास करते और छोड़ देते। यकीन कीजिये, उसके पिता की इसी अति-सहिष्णुता ने अंकिता की जान ली। यदि वह पिता उसी समय पुलिस के पास जाता, राजनैतिक संगठनों के पास जाता, तो सम्भव था कि आज लड़की जी रही होती। पर किसी भी तरह चुपचाप मामले को सुलटा लेने के भाव ने अंकिता को मार दिया। यह कठोर सच है कि हमारे देश में बेटियों से जुड़े मामले में इस तरह की निर्लज्ज चुप्पी आम है।

पुलिस कस्टडी में शाहरुख हंस रहा है,यह नपुंसक पुलिस व्यवस्था के मुंह पर थूक है,आपको कोई नही बचाएगा…

जिस दिन देश में ये लोग 40 प्रतिशत से अधिक हुए, उस दिन कोई आपकी बात नही करेगा,आपके आसपास जिस दिन ये लोग आ गए उसके बाद आपका जीना दूभर हो जायेगा, एक साल के अंदर आप मिट जायेंगे…एकजुट,सशस्त्र होइए एवं इनका बहिष्कार कीजिए।सारी डिग्री और महल धरे के धरे रह जायेंगे,ये जो दिल्ली में गंगाराम अस्पताल है,वो गंगाराम जी भी कभी लाहौर में बहुत बड़े सेठ थे,जैसे तैसे भागे थे…सब छोड़कर,दूर क्यों जाना है,कश्मीर,कैराना ,मालदा और ऐसे अनेक छोटे मोटे मुहल्ले आपके ही शहर में हैं।देख लीजिए,सबक सीखिए।इतिहास और वर्तमान से।अंकिता हत्या कांड
मदनपुर टूडे
आशुतोष ने व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आप देखियेगा, केस चलेगा तब शाहरुख की माँ मीडिया में आ कर कहेगी- “हम बहुत गरीब हैं। मेरा बेटा ही कमाने वाला है उसे छोड़ दिया जाय, देश की बौद्धिकता उछलने लगेगी, आधी रात को कोर्ट खुलने लगेंगे,उसको नाबालिग साबित कर देंगे,कोई केजरीवाल उसे सिलाई मशीन और 25 हजार रुपए भी देगा जैसे निर्भया के हत्या करने वाले अफरोज को दिया था। सब उसकी ओर खड़े हो जाएंगे,अंकिता की पीड़ा किसी को याद नहीं रहेगी।

जिस देश में कभी एक महारानी की प्रतिष्ठा पर पूरा राज्य बलिदान दे जाता था, वह देश अब बेटियों की सुरक्षा करना तक भूल गया है।इस देश का इससे अधिक दुर्भाग्य कुछ भी नहीं।

आयोजित आक्रोश सभा में सैल्यूट तिरंगा बिहार के प्रधान संरक्षक जितेंद्र सिंह परमार, समाजसेवी ज्ञान दत्त पांडे, विश्व हिंदू परिषद धर्म प्रसार के प्रखंड अध्यक्ष रामपुकार सिंह, नवीन पाठक, दिलीप प्रसाद गुप्ता, करणी सेना के प्रखंड अध्यक्ष उपेंद्र सिंह एवं टुनटुन सिंह, माता शबरी सत्संग समिति के संयोजक दयानंद मांझी, सैल्यूट तिरंगा के जिला अध्यक्ष बबलू राम, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता दीपक यादव, बबन कुमार सिंह, जनार्दन यादव, हर्षवर्धन सिंह राठौर, अमन सिंह ,राजन सिंह, बबन पासवान ,महेंद्र पासवान, अनिल सिंह सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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