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36 घंटे निर्जला उपवास में छठव्रतियों को भटकने के लिये प्रशासन द्वारा विवश करना,देव छठ मेला को समाप्त करने का बना बहुत बड़ा हथियार-आलोक सिंह

देव-

सूर्य उपासना एवं लोक आस्था का महापर्व चार दिवसीय कार्तिक छठ पूजा के अवसर पर औरंगाबाद जिले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक सूर्य नगरी देव में लगने वाला छठ मेला उदियमान सूर्य को अर्ध्य के साथ सम्पन्न हो गया । देव की खाशियत यह है कि देव में कुष्ठ निवारण सूर्य कुंड के साथ ही ख्याति प्राप्त प्राचीन सूर्य मंदिर भी विद्यमान है।यहां प्रत्येक वर्ष साल में 2 बार चैती छठ एवं कार्तिक छठ पूजा के अवसर पर लाखों छठव्रती श्रद्धालुओं का आगमन होता है।

देव के स्थानीय समाजसेवी और भारतीय जनता पार्टी से तालुकात रखने वाले समाजिक कार्यकर्ता,देव के प्रमुख मांग को सरकार के कानों तक पहुँचाने वाले, हमेशा जनहित की बातों मजबूती से पदाधिकारियों के समक्ष पेश करने वाले कुशल समाजसेवी में एक आलोक कुमार सिंह ने जिला प्रशासन पर एक बड़ा आरोप लगाया है।उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यह छठ मेला प्रशासनिक उदासीनता या निष्क्रियता के कारण दिनों दिन सिकुड़ते जा रहे। इसका सामाजिक राजनीतिक एवं प्रशासनिक कई कारण है।पहले देव मेला 1 से 1.5 कि.मी. के परिधी में सभी छठव्रती श्रद्धालु समाहित हो जाते थे , लोग प्रारम्भ में बैलगाड़ी से आते , समय के साथ लोगो का आगमन ट्रैक्टर से होते हुये आर्थिक संपन्नता ने लग्जरियस गाड़ी तक का सफर तय कर लिया।छोटी सी जगहों में इतनी गाड़ियों का आगमन देव में जगहों को कमतर साबित कर प्रशासनिक महकमो को मेला से जुड़े तैयारियों पर विचार करने के लिये मजबूर किया।

प्रशासन अपने स्तर से मेला लगाने बसाने का लेकर तैयारी शुरू किया और मेला को सरकारी मेला , प्रशासनिक मेला बना दिया । मेला में प्रशासनिक हनक इतना ज्यादा बढ़ गया कि मेला क्षेत्र 1 से 1.5 कि.मी. के दायरे से 4 से 5 कि.मी. की परिधि में फैल गया । सुविधा विस्तार नगण्य रही , मन आया तो आवासन हुआ , मन हुआ तो पानी की उपलब्धता हुआ , मन हुआ तो बिजली मिली , मन हुआ तो शौचालय की उपलब्धता अस्थायी तौर पर किया और आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का मूल्यांकन न किया गया।

इस बार कार्तिक छठ पूजा /मेला प्रशासनिक हनक से अत्यंत प्रभावित हुआ और देव में आस्था के बाद भी आने वाले छठव्रती श्रद्धालुओ की संख्या बेहद कम रही । यह चिंता की विषय है , क्योकि यह हम सबो के आस्था के साथ ही क्षेत्रीय लोगो की रोजी रोटी व्यवसाय से भी जुड़ा है । देव सूर्य मंदिर लोगो की आय का साधन है , किसी ने अपने घर को आवासन में बदल कर , किसी ने छठव्रतियों एवं श्रद्धालुओ के नास्ते-भोजन की चिंता कर होटल व्यवसाय खड़ा किया , किसी ने फूल माला प्रसाद के माध्यम से श्रद्धालुओं से खुद को जोड़ा । इन सब के बीच एक गहरा सम्बन्ध बनता गया।

जिसे किसी न किसी तरह प्रशासनिक तैयारियों ने प्रभावित किया।मेला क्षेत्र अब देव मोड़ से आने वाले श्रद्धालुओं के लिये लक्ष्मीबिगहा , उधमबिगहा , उपरदाहा , कुशहा , धमौल , करमाडीह जैसे गाँव जहां शासन प्रशासन की सुविधा तैयारी नगण्य , करहारा के रास्ते आने वाले लोग भरवार , सड़कर , बेलसारा , धनंजैया , आनंदपुरा , कामाबिगहा यारी से आने वाले छठ व्रतियों का ठहराव दधपा , बहुआरा के समीप होने लगा , उसी तरह अम्बा हो या मदनपुर के रास्ते आने वाले श्रद्धालुओं को देव से 3 – 4 कि.मी. पहले के गांवों में प्रशासनिक बेरियर लगने से होने लगा।36 घंटे निर्जला उपवास का यह पर्व में छठव्रतियों को भटकने के लिये प्रशासन द्वारा विवश करना देव छठ मेला को समाप्त करने का बहुत बड़ा हथियार बन गया।

हर बार की तरह इस बार भी देव मेला को राजकीय मेला का झुनझुना बजाया गया । 50 लाख आवंटन भी शायद उपलब्ध कराने की बातें सामने आयी है । यदि यह सच है तो मेला के नाम पर जिला प्रशासन द्वारा विभागीय बजट का जिस प्रकार दोहन किया गया उसका क्या होगा ? सरकार को यह पता था कि देव में मेला लगता है , अब सरकार 50 से 55 लाख का आवंटन यदि स्वीकृत कराया है तो इस पैसे से इस बार के मेले में कौन से कार्य हुआ । छठ मेला की तैयारी प्रायः हर बार की तरह विभिन्न विभागों की बजटीय उपबंध से कराया गया है , लगभग 28 से 30 लाख रुपये की उपलब्धता जिला प्रशासन ने सुनिश्चित कराया है , क्या उन सभी विभागों का टोकन की राशि राजकीय मेला के लिये आवंटित राशि से किया जायेगा ? या जिलाप्रशासन से यह चुनावी चंदे की उगाही का सशक्त माध्यम बन कर रह जायेगा।

एक बार विचार कर हम सबो को मेला लगाने , मेला बसाने , और छठव्रतियों का भरोषा विश्वास जीतने के लिये कार्य करना होगा । जिस प्रकार , गत वर्ष से शक्ति मिश्रा ने निःशुल्क लंगर लगा कर , तो किसी समाजिक संगठनों ने दुग्ध वितरण , आवासन व्यस्था से जुड़ कर , किसी ने फल वितरण , जैसे प्रकल्पों से जुड़ कर कार्य करना प्रारम्भ किया है , उसे और विस्तार करना पड़ेगा । छठ मेला के प्रारम्भ में नहाय खाय के दिन ही विगत कई वर्षो से गंगा आरती भी लोगो का धार्मिक जुड़ाव की महशुस कराया है । भगवान सूर्य नारायण सेवा समिति गंगा आरती के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना के लिये कार्य कर रही।अनवरत देव में आने वाले छठ के दौरान व्रतियों को शक्ति मिश्रा फाउंडेसशन और शिव श्रृंगार समिति के द्वारा भोजन कराकर लोगों के पेट भरने का कार्य किया।4 लाख की अनुमान को लेकर शक्ति मिश्रा ने इस बार भोजन की व्यवस्था किया था लेकिन 2 लाख लोग भोजन कर पाएं।

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