चितरंजन कुमार:-
बुधवार को जितिया पर्व का त्यौहार पूरे विधि विधान के साथ संपन्न हो गया। उस दिन औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड के कुशहा गांव में हुई घटना ने दिल को झकझोर कर रख दिया। गांव के लोग सोचते और देखते रह गएं तब तक चार नौनिहाल काल के गाल में समा गएं। ग्रामीणों ने बताया की जिऊतिया का जौ बुनने गई 4 से 5 महिलाओं के साथ 20 बच्चे गांव के ही पूरब दिशा में स्थित आहर में नहाने चली गई। महिलाओं के साथ नहा रहे एक के बाद दो और दो के बाद तीन और चार बच्चे गहरे पानी में डूबने लगे।
चारों को देख अन्य 16 बच्चे भी बचाने के लिए कूद गए। लेकिन जो निकालने गया उसमे से ही चार बच्चे डूब गए। जिसकी मौके पर ही जान चली गई। हालाकि महिलाओं ने अथक प्रयास करके 16 को बचा लिया। लेकिन चार को बचाने के चक्कर में खुद डूबने लगे। तो पानी से बाहर निकल कर हल्ला किया। जिसके बाद गांव के लोग दौड़े तब तक बहुत देर हो गई थी। जब तक की गांव के लोग पानी से दुबे हुए 4 बच्चो को निकाल पाते तब तक चारों ने दम तोड दिया था। उसके बाद जब चारों को बाहर निकाला गया तो आनन फानन में मदनपुर अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन चिकित्सकों ने नज टटोलते ही चारों को मृत्य घोषित कर दिया।
मेडिकल कॉलेज में शिक्षक बनने की सपना संजोई थी सोनाली
जितिया पूजा की छुट्टी मिलने छुट्टी का लुफ्त उठाने गांव के ही पास आहर में गई। एक बालक के साथ चार किशोरियों की आहर में डूबने से मौत हो गई। उसी में चार में से एक बिरेंद्र यादव की पुत्री सोनाली कुमारी अपने दोस्तों के साथ आहर में नहाने चली गई थी। वह हमेशा अपने घर में माता पिता के साथ रहती थी अपने दोस्तों से कहती थी कि तुम लोग डॉक्टर बनना। हम डॉक्टर बन कर तुम लोगों को डॉक्टरी पढ़ाएंगे और तुम लोग जहां काम करोगी वहां हम पढ़ाएंगे।
सोनाली अपने 4 बहनों में सबसे छोटी थी। सोनाली के पिता बिरेंद्र यादव गांव में ही एक छोटी सी किराना दुकान चला कर अपने 4 बेटियों को परिवरिश करने तथा बेटियों को बेहतर शिक्षा दिला रहे हैं। बिरेन्द्र यादव ने रोते हुए बताया कि मेरी 4 बेटियां है।
परंतु हमने अपनी बेटियों को बेटा जैसा प्यार दुलार दिया है। उनकी इच्छा है कि वह अपने सभी बेटियों को पढ़ा लिखा कर डाक्टर इंजीनियर और शिक्षक बना अपने समाज में बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करें। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। सोनाली सबसे छोटी बेटी हमेशा कहती थी कि हम मेडिकल कॉलेज में शिक्षक बनाकर समाज का सेवा करेंगे।
सरोज यादव की पुत्री राखी कुमारी 10वीं कक्षा की छात्रा थी। 4 माह बाद फरवरी में बोर्ड के परीक्षा में शामिल होना था।
सरोज वाहन चालक हैं। ट्रक चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। राखी अपने दो बहन और दोनो भाइयों में सबसे बड़ी थी। राखी का मुखाग्नि उसके चाचा ब्रजेश यादव दिया।
नीलम कुमारी 9वीं कक्षा की छात्रा थी। उसकी माता ने रोते हुए बताया की नीलम पढ़ाई के अलावे अपने घर में हांथ बटाती थी। लेकिन उसकी माता जियुतिया पर्व में प्रयोग होने वाले जितिया बनवाने मदनपुर बाजार गई थी।
जब घर पहुंची तो अपनी बेटी की खबर पाकर अचंभित रह गई। नीलम के पिता युगलकिशोर एंबुलेंस चालक हैं।
दो लड़कियों के बचाकर तीसरे को बचाने में अपनी जान गवा बैठा अंकज
अंकज कुमार अपने माता पिता का दूसरा सनातन था। अंकज से एक बड़ा भाई पंकज है। अंकज के पिता मजदूरी कर अपना घर का भरण पोषण करते हैं।
अंकज ने अंखिरी सांस तक अपने साथ डूब रही दो लड़कियों को बचाया। जब वह पूरी तरह से थक गया और डूबते डूबते पानी पी लिया तो अंकज ने भी अपनी अखरी सांस उसी पानी में लेकर डूब गया।











Forrest Paynter
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