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वैज्ञानिक सुमित से आचार्य बने मदनपुर के सुमिताचार्य ने 4 देशों में लहराया हिंदुत्व का झण्डा

चितरंजन कुमार – इसरो ने चांद पर चन्द्रयान का सॉफ्ट लैंडिंग करा कर इतिहास रच दिया है। तो इधर भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक अब ज्योतिष्य  और आचार्य बन विदेश में हिंदुत्व की झंडा बुलंद की है। औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखण्ड के महुआवाँ चट्टी के रहने वाले पद्मभूषण और पद्मश्री पुरुष्कार  जैसे राष्ट्रीय स्तर के राष्ट्रपति पुरुष्कारों के लिए चयनित हो चुके, श्री सुमिताचार्य महाराज जी ने एक महीने के भीतर भारत से बाहर चार देशों में शिव पुराण कथा करके और ज्योतिष शिविर लगा के हिंदुत्व की लहर दौड़ा दी है।जिन देशों में लोग हिंदू का नाम भी नहीं जानते वहाँ शंकर भगवान के लिए अनन्य भक्ति का उद्गम होने लगा है।सुमिताचार्य महाराज ने इसकी शुरुवात थाईलैण्ड स्थित बैंगकॉक शहर से की। जहाँ लगातार 12 अगस्त से16 अगस्त तक धर्म प्रचार चला और फिर वहाँ से महाराज जी ने हाँग-काँग देश जाकर 18 अगस्त तक धर्म प्रचार हिंदुत्व का प्रचार किया। हाँग-काँग से वियतनाम और फिर वहाँ से बाली, इंडोनेशिया में सनातन धर्म की लहर को दौड़ाया।थाईलैण्ड के फ़ुक़ेत में भी सुमिटाचार्य जी महाराज के नेतृत्व में हिंदुत्व की लहर देखने को मिली।उन्होंने फ़ुक़ेत के शिव मंदिर में शिव महापुराण की भव्य कथा कही जहां अलग अलग देशों के हिंदू समुदाय उपस्थित थे।24 अगस्त को बैंकॉक शहर में इनकी कथा फिर से होनी है।ज्ञात हो कि इंस्टाग्राम जैसे ऑनलाइन सोशल मीडिया पर इनकी लाखों में फैन फॉलोइंग है जो विदेश में हिंदुत्व की प्रचार करने के बाद अब और अधिक तेज़ी से बढ़ते जा रही है।बिहार राज्य से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाने,जाने वाले कुछ गिने चुने ज्योतिष और कथावाचक के सूची में औरंगाबाद जिले के मदनपुर क्षेत्र के सुमिताचार्य अव्वल हैं।पद्मभूषण और पद्मश्री पुरष्कार जैसे राष्ट्रीय स्तर के राष्ट्रपति पुरष्कारों के लिए चयनित हो चुके हैं श्री सुमिताचार्य जी महाराज का विज्ञान और शास्त्र दोनों पर गहरी पकड़ है।जनता को इनकी कथा मंत्रमुग्ध कर देती है।ज्ञात हो कि सुमित आचार्य बनने से पहले कुशल वैज्ञानिक थे और वे देश में कई बड़ी बड़ी अविष्कार को उन्होंने किया है।

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